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भूगोल प्रवेशद्वार


विश्व का मानचित्र

भूगोल प्रवेशद्वार में आपका स्वागत् हैं। भूगोल एक अत्यधिक पुराना, रोचक तथा ज्ञानवर्धक विषय रहा हैं। वर्तमान में इसका महत्व अत्यधिक बढ़ गया हैं जहां एक ओर पारिस्थितिकी, स्थलाकृति, जलवायु, भूमंडलीय ऊष्मीकरण, महासागर जैसे भौतिक भूगोल के प्रमुख उप-विषय हैं वही दूसरी ओर संसाधन, पर्यटन, जनसंख्या, सांस्कृतिक, धर्म, कृषि जैसे विषय मानव भूगोल के उप-विषय हैं। भूगोल में नयी तकनीकों जैसे, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और डिजिटल कार्टोग्राफी के अधुनातन प्रयोगों ने इसकी उपयोगिता को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है। भूगोल के द्वारा पृथ्वी के ऊपरी स्वरुप और उसके प्राकृतिक विभागों (जैसे पहाड़, महादेश, देश, नगर, नदी, समुद्र, झील, डमरुमध्य, उपत्यका, अधित्यका, वन आदि) का ज्ञान होता है। प्राकृतिक विज्ञानों के निष्कर्षों के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करते हुए पृथ्वीतल की विभिन्नताओं का मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन ही भूगोल का सार तत्व है। पृथ्वी की सतह पर जो स्थान विशेष हैं उनकी समताओं तथा विषमताओं का कारण और उनका स्पष्टीकरण भूगोल का निजी क्षेत्र है। भूगोल शब्द दो शब्दों भू यानि पृथ्वी और गोल से मिलकर बना है।

भूगोल एक ओर अन्य श्रृंखलाबद्ध विज्ञानों से प्राप्त ज्ञान का उपयोग उस सीमा तक करता है जहाँ तक वह घटनाओं और विश्लेषणों की समीक्षा तथा उनके संबंधों के यथासंभव समुचित समन्वय करने में सहायक होता है। दूसरी ओर अन्य विज्ञानों से प्राप्त जिस ज्ञान का उपयोग भूगोल करता है, उसमें अनेक व्युत्पत्तिक धारणाएँ एवं निर्धारित वर्गीकरण होते हैं। यदि ये धारणाएँ और वर्गीकरण भौगोलिक उद्देश्यों के लिये उपयोगी न हों, तो भूगोल को निजी व्युत्पत्तिक धारणाएँ तथा वर्गीकरण की प्रणाली विकसित करनी होती है।

प्रमुख लेख

पर्यटन भूगोल
पर्यटन भूगोल या भू-पर्यटन, मानव भूगोल की एक प्रमुख शाखा हैं। इस शाखा में पर्यटन एवं यात्राओं से सम्बन्धित तत्वों का अध्ययन, भौगोलिक पहलुओं को ध्यान मे रखकर किया जाता है। नेशनल जियोग्रेफ़िक की एक परिभाषा के अनुसार किसी स्थान और उसके निवासियों की संस्कृति, सुरुचि, परंपरा, जलवायु, पर्यावरण और विकास के स्वरूप का विस्तृत ज्ञान प्राप्त करने और उसके विकास में सहयोग करने वाले पर्यटन को "पर्यटन भूगोल" कहा जाता है। भू पर्यटन के अनेक लाभ हैं। किसी स्थल का साक्षात्कार होने के कारण तथा उससे संबंधित जानकारी अनुभव द्वारा प्राप्त होने के कारण पर्यटक और निवासी दोनों का अनेक प्रकार से विकास होता हैं। पर्यटन स्थल पर अनेक प्रकार के सामाजिक तथा व्यापारिक समूह मिलकर काम करते हैं जिससे पर्यटक और निवासी दोनों के अनुभव अधिक प्रामाणिक और महत्त्वपूर्ण बन जाते है। भू पर्यटन परस्पर एक दूसरे को सूचना, ज्ञान, संस्कार और परंपराओं के आदान-प्रदान में सहायक होता है, इससे दोनों को ही व्यापार और आर्थिक विकास के अवसर मिलते हैं, स्थानीय वस्तुओं कलाओं और उत्पाद को नए बाज़ार मिलते हैं और मानवता के विकास की दिशाएँ खुलती हैं साथ ही बच्चों और परिजनों के लिए सच्ची कहानियाँ, चित्र और फिल्में भी मिलती हैं जो पर्यटक अपनी यात्रा के दौरान बनाते हैं। पर्यटन भूगोल के विकास या क्षय में पर्यटन स्थल के राजनैतिक, सामाजिक और प्राकृतिक कारणों का बहुत महत्त्व होता है और इसके विषय में जानकारी के मानचित्र आदि कुछ उपकरणों की आवश्यकता होती है।

क्या आप जानते हैं?

पनामा नहर का त्रिविमीय चित्रण
मदुरई का मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर

चर्चित स्थान

तियांजिन पोर्ट
  • तियांजिन: में एक धमाके में 50 लोगों की मृत्य हो गयी और कम से कम 70 लोग घायल हो गये।
  • फिलीपींस: में 8 अगस्त 2015 को आये सूडेलॉर नामक टाइफून से कम से कम 1,50,000 लोगों को अपना घर ख़ाली कर के सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। इस समुद्री तूफ़ान ने पूर्वी चीन को भी अपना निशाना बनाया।
  • सिनाबंग: सिनाबंग ज्वालामुखी इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी हिस्से में कारू पठार पर स्थित एक ज्वालामुखी पर्वत है। इसमें हालिया विस्फोट 26 जून 2015 को हुआ था जिसकी वजह से कम से कम 10,000 लोगों को अपना घर ख़ाली कर के सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।
  • नेपाल: में आया भूकंप क्षणिक परिमाण परिमाप पर 7.8 या 8.1 तीव्रता का भूकम्प था जिसका अधिकेन्द्र लामजुंग, नेपाल से 38 कि॰मी॰ दूर था। भूकम्प मूल की गहराई लगभग 15 कि॰मी॰ नीचे थी। 1934 के बाद पहली बार नेपाल में इतना प्रचंड तीव्रता वाला भूकम्प आया है जिससे 8000 से अधिक मौते हुई और 2000 से अधिक घायल हुए।
  • आज का देश

    दक्षिण सूडान
    दक्षिण सूडान या 'जनूब-उस-सूडान' (आधिकारिक तौर पर दक्षिणी सूडान गणतंत्र) उत्तर-पूर्व अफ़्रीका में 3° और 13° समानांतर उत्तर आक्षांश तथा 24° और 36 ° मध्याह्न पूर्व देशांतर पर स्थित एक स्थल-रुद्ध देश है। जुबा देश की वर्तमान राजधानी और सबसे बड़ा शहर भी है। देश के उत्तर में सूडान गणतंत्र, पूर्व में इथियोपिया, दक्षिण-पूर्व में केन्या, दक्षिण में युगान्डा, दक्षिण-पश्चिम में कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य और पश्चिम में मध्य अफ़्रीकी गणराज्य है।

    यह उष्णकटिबंधीय वन, दलदलों और घास के मैदानी भागों से परिपूर्ण है। यहाँ की प्रमुख नदी श्वेत नील है, जो दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा सहित देश के कई भागों से होकर गुजरता है। यह अफ्रीका महाद्वीप के केंद्र में स्थित है और इसकी सीमा छह देशों से सटी है। यह प्राकृतिक तेल के लिहाज से संपन्न देश है।

    दक्षिण सूडान को 9 जुलाई 2011 को जनमत-संग्रह के पश्चात स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस जनमत-संग्रह में भारी संख्या (कुल मत का 98.83%) में देश की जनता ने सूडान से अलग एक नए राष्ट्र के निर्माण के लिए मत डाला। यह विश्व का 196वां स्वतंत्र देश, संयुक्त राष्ट्र का 193वां सदस्य तथा अफ्रीका का 55वां देश है।

    चयनित भूगोलवेत्ता

    अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट
    अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट (जर्मन:Friedrich Wilhelm Heinrich Alexander von Humboldt ; जन्म १७६९- मृत्यु १८५९ ई.) एक प्रमुख भूगोलवेत्ता थे। उनका जन्म बर्लिन में तत्कालीन शाही परिवार में हुआ। उनकी सबसे प्रसिद्द रचना कॉसमॉस- १८४५ से १८६२ के बीच पांच खण्डो में प्रकाशित हुई और अन्य रचना साइनलैण्ड पर लिखा शोध ग्रन्थ १७८९ में छपा। हम्बोल्ट के साथ ही भूगोल में आधुनिक युग की शुरूआत मानी जाती है। हम्बोल्ट ने सर्वप्रथम वनस्पति विज्ञान में परिमाणात्मक विधियों का प्रयोग किया जिनसे जैव भूगोल की मजबूत आधारशिला का निर्माण हुआ। यह हम्बोल्ट ही थे जिनके द्वारा भूगोलीय घटनाओं की दीर्घावधिक मॉनिटरिंग वकालत की गयी और इस कार्य ने आधुनिक भूचुम्बकीय और मौसम वैज्ञानिक प्रेक्षणों का मार्ग प्रशस्त किया।
    हम्बोल्ट एक अनुभववादी विचारक थे और घटनाओं के प्रेक्षण और मापन में यकीन रखते थे। उन्होंने घर में बैठकर चिंतन करके लेखन करने की बजाय भ्रमण करके घटनाओं के प्रेक्षण के बाद उनके निरूपण की विधा पर कार्य किया। हम्बोल्ट ने अपने जीवन में लगबग साढ़े छह हजार किलोमीटर की यात्रायें कीं जिनमें सबसे प्रमुख उनकी दक्षिण अमेरिका की यात्रा है। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस महादीप की यात्रा और इसका वर्णन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने दूरबीन, तापमापी, साइनोमीटर, सेक्सटैंट, वायुदाबमापी इत्यादि उपकरणों से लैस होकर मापन कार्य किये और उनकी इस यात्रा के वर्णन का प्रकाशन २१ खण्डों में हुआ। हम्बोल्ट उन पहले लोगों में से थे जिन्होंने दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कभी जुड़े हुए होने की बात कही थी। हम्बोल्ट कि सबसे प्रमुख कृति कॉसमॉस है जिसमें उन्होंने संश्लेषणात्मक विचारों के साथ ज्ञान की विभिन्न शाखाओं में सामंजस्य और एकता लाने का प्रयास किया है। इस कार्य में वे ब्रह्माण्ड को एक एकीकृत इकाई के रूप में भी पुरःस्थापित किया। वे अनेकता में एकता के सिद्धांत के पुरोधा थे।

    भूगोल के उप-प्रवेशद्वार